हमारी भारतीय संसकृति हमें ये कदापि नहीं सिखाती कि हम किसी महान व्यक्तित्व की क़ुरबानी (रोम शासकद्वारा संत वैलेंटाइन को फांसी)पर तमाचा मारें | वर्तमान समय में ऐसा ही हल कुछ वैलेंटाइन डे का है जिसने आज हमारे समक्ष सामाजित पतन की स्थिति पैदा कर दी है |
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| वैलेंटाइन डे का विकृत स्वरुप |
जब रोम शासक क्लाडियस ने विवाह पर प्रतिबन्ध लगाया क्योंकि उसे लगता था की विवाहित कभी अच्छे सैनिक नहीं हो सकते किन्तु यह बात रोम चर्च के महान पादरी (संत वैलेंटाइन )को बिलकुल रास नहीं आई और उन्होंने विवाह के पवित्र बंधन की जमकर वकालत की क्योंकि उन्हें पता था विवाह न करने पर ये लोग वैश्यावृत्ति की और प्रेरित होंगे | उन्होंने तो स्वयं को कुर्बान कर दिया परन्तु वर्तमान पीढ़ी उनकी इस क़ुरबानी का मजाक उड़ाते हुए उनकी पवित्र भावना को भुलाकर इस दिन को मात्र युवक -युवतियों के बीच में रोमांस के विकृत स्वरुप के रूप में मनाती है |इसके लिए प्रोत्साहन भावी पीढ़ी के लिए अपराध है|

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